Friday, November 7, 2008

इसलिए है पत्रकारों मैं खुजली

आज प्रेसक्लब में कोफी के साथ बातों का दौर चल रहा था, बातों-बातों में बात पत्रकारों में एक -दूसरे की टांग खींचने की प्रवृति पर आ गयी, अशोक थापलियालजी ने इसका बड़े मजेदार ढंग से विवेचन किया, बोले यह खुजली अनलिमिटेड है,इसका सम्बन्ध पोरानिक काल से है, एक बार ब्रह्माजी की दाडी में खुजली हो गयी, तो सलाह मशविरे के बाद दाडी कटवाने का निर्णय लिया गया, हज्जाम बुलाया गया, हज्जाम रस्ते में नारद से टकरा गया, हड़बड़ी का कारन जाने बिना नारदजी उसे कहाँ छोड़ने वाले थे, सारीबात पता चलने पर उन्होंने हज्जाम से एक वचन ले लिया कि वो दाडी के बाल कहीं फेंकने के बजाय उन्हें लाकर देदे, हज्जाम ने ऐसा ही किया, नारदजी ने सारे बाल अपने कमंडल में डाले और मृत्यु लोक में छिड़क दिए, उससे जो जीव पैदा हुए वो पत्रकार बने, इसलिए सुनो छोरों ये खुजली अनलिमिटेड है, लाइलाज है, सो सब भूल -भाल कर मस्त रहो, लेट अस एन्जॉय,

शिवराज गूजर

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