Saturday, January 3, 2009

रिश्ते की आड़

मंगेतर कह कर मीना ने
जिससे मिलवाया था
पिछली राखी पर वह
उससे राखी बंधवाने आया था,
समझदानी मैं बात घुसती नही देख
मैंने पूछा,
ये कैसी सगाई है
इस साल का मंगेतर
पिछले साल का भाई है,
वो बोली
तू भी ना शिवराज
कुछ नही समझता
वो तो एक दिखावा था
ताकि उस रिश्ते की आड़ मैं
यह रिश्ता पलता रहे
लोगों की नजरों से बचा रहे
शिवराज गूजर

10 comments:

विवेक said...

बहुत दिलचस्प..सही निशाना लगाया है आपने।

शिवराज गूजर. said...

thanks vivek.

अशोक मधुप said...

यह रिश्ता सुरक्षा कवच है। इसी लिए तो इसका दुयपयोग हो रहा है।

neelima sukhija arora said...

कुछ हटकर

श्रद्धा जैन said...

hmmmmmmmmm badiya kathkash hai
aajkal yahi ho raha hai

राजीव जैन Rajeev Jain said...

Baap re !

AISA !!!!!!!!!!!!

तरूश्री शर्मा said...

ये समाज का बड़ा विकृत चेहरा है दोहरी मानसिकता वाला। कम हिम्मत और इसी समाज में अपने आप को साबित करने के चलते लोग क्या क्या नहीं करते।

aki said...

"Suside Karlo Tum"
Ye kyon nahin kahte aap su ladki ko.
Hemendra Soni

aki said...

"Suside Karlo Tum"
Ye kyon nahin kahte aap us ladki ko.
Hemendra Soni

Vidhu said...

रिश्तों की आड़ की सच्चाई के लिए बधाई

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